एस के श्रीवास्तव विकास
वाराणसी/-पितृ विसर्जन पर पंचकोशी तीर्थ पड़ाव स्थित रामेश्वर वरूणा नदी घाट पर रविवार को सैकड़ो लोगों ने श्राद्ध कर्म कर पितरों का तर्पण किया। पितृ विसर्जन के लिए रामेश्वर,बरेमा,रसूलपुर,पेडूका,परसीपुर,हिरमपुर,लक्षीपुर,जगापट्टी,चक्का,हथिवार,सिरिहिरा सेवापुरी,हरिहरपुर समेत कई गाँवो के ग्रामीण सुबह से ही वरूणा नदी तट पर पहुंचने लगे।नदी उस पार असंख्यात कच्चे घाट पर भी पिंडा पारने का कार्य हुआ।वरूणा नदी में स्नान के बाद मिट्टी का बेदी बनाकर आटे के पिंड,पुष्प,नैवेद्य,अन्य पूजन सामग्री के साथ पुरोहित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार व कर्म के साथ तर्पण किया।पितरों की श्रध्दांजलि अर्पित करने के बाद ब्राह्मणों व गरीबों को दान दक्षिणा प्रदान की।साथ ही साथ रामेश्वर महादेव मंदिर में स्थित देव विग्रहों का दर्शन किया।

इस अवसर पर धन-धान्य ,सुख समृद्धि,संतान व स्वर्ग प्राप्ति समेत मंगल कामना की।पूजन अर्चन के बाद पितरों का निवाला निकाल ब्राह्मणों को भोजन कराया गया।रामेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी आचार्य पंडित अनूप तिवारी,पंडित प्रमोद तिवारी,ज्योतिषाचार्य पंडित शीतला प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि अमावस्या तिथि शुभ पर्व है।जीवन चक्र में जीव परमात्मा से मिलने के लिए इस मुहूर्त में पृथ्वी लोक में अवतरित होते हैं उन्हें हम श्रद्धा भाव देते हुए उनका सहृदय पूजन कर कृत से कृतार्थ होते हैं।अपने कुल का स्मरण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष में मृत्यु तिथि पर पूर्वजो के नाम श्राद्ध किया जाता है।पितृ पक्ष अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या भी कहा जाता है। वनवासी( मुसहर)समाज से जुड़े महिला,पुरुष व बच्चे घाट पर पत्तल,दोना,कुश समेत सामग्री देकर विक्री कर रहे थे।माली समाज की ओर से माला फूल की दुकान लगा हुआ था।रघुनाथपुर से प्रमोद दुबे,सिरिहिरा से शीतला मोदनवाल व भैयालाल मौर्य,ज्वाला सिंह,रामजी मौर्य रामेश्वर के सुशील व विनोद गोंड़ ने बताया कि कई वर्ष से पिंडदान रामेश्वर घाट पर करते चले आ रहे हैं।पिंडदान के बाद यहाँ देवालयों में दर्शन का सौभाग्य मिलता है।


