एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सजायाफ्ता आसाराम इन दिनों वाराणसी के बड़ागांव स्थित अनौरा आश्रम में डेरा डाले हुए है।करीब 12 साल के लंबे सन्नाटे के बाद इस आश्रम में एक बार फिर वैसी ही हलचल दिखी,जैसी साल 2013 से पहले हुआ करती थी।मेडिकल पैरोल पर बाहर आए आसाराम ने रविवार को व्यास पीठ से अपने अनुयायियों को संबोधित किया,जिसे सुनने के लिए पूर्वांचल के जौनपुर,भदोही,गाजीपुर,मिर्जापुर,आजमगढ़,चंदौली और पड़ोसी राज्य बिहार के कोनों-कोनों से हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी।आश्रम प्रशासन ने परिसर के भीतर सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं।सत्संग हॉल में प्रवेश करने वाले हर श्रद्धालु का मोबाइल फोन मुख्य द्वार पर ही जमा कराया जा रहा है।आश्रम के सेवादारों को स्पष्ट निर्देश हैं कि भीतर की कोई भी गतिविधि कैमरे में कैद न हो।यदि कोई छिपकर वीडियो बनाता पकड़ा जा रहा है तो तत्काल उसे डिलीट करवाया जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार जिस आश्रम में डेढ़ दशक से सन्नाटा पसरा था,वहां अब लग्जरी गाड़ियों के काफिले और समर्थकों के हुजूम से गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया है।रविवार दोपहर करीब 2:20 बजे आसाराम का काफिला अनौरा आश्रम से अलईपुरा के लिए रवाना हुआ।चर्चा है कि वह गंगा नदी के किनारे किसी शांत स्थान पर समय बिताने गये है,जिसके बाद रात में दोबारा अनौरा आश्रम लौटने की संभावना है।ज्ञात हो कि आसाराम को राजस्थान और गुजरात हाईकोर्ट के बाद 7 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हृदय संबंधी गंभीर बीमारी के आधार पर 31 मार्च 2025 तक की अंतरिम जमानत दी थी।गौरतलब है कि साल 2013 में शाहजहांपुर की एक नाबालिग छात्रा के साथ जोधपुर के मनई आश्रम में ‘भूत-प्रेत का साया’ हटाने के नाम पर दुष्कर्म करने का आरोप आसाराम पर लगा था।पीड़िता ने 20 अगस्त 2013 को दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।31 अगस्त 2013 को गिरफ्तारी के बाद 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।तब से वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद थे और अब सालों बाद पहली बार मेडिकल पैरोल पर बाहर आये है।


