एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के पास प्रस्तावित नई अर्बन टाउनशिप “काशी स्पोर्ट्स सिटी” परियोजना के लिए भूमि अर्जन संबंधित प्रारंभिक अधिसूचना के बाद प्रभावित गांवों के किसानों में विरोध तेज हो गया है।इसी मुद्दे पर किसानों ने एक बैठक आयोजित कर अपनी रणनीति पर चर्चा की और स्पष्ट कहा कि वे किसी भी सूरत में अपनी कृषि भूमि देने को तैयार नहीं हैं।बताया गया कि जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा सामाजिक समाघात निर्धारण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई है,जिसके तहत काशी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के लिए कुल लगभग 86 हेक्टेयर भूमि अर्जन करने का प्रस्ताव है।

इसमें गंजारी गांव की 234 आराजी से लगभग 47 हेक्टेयर,हरसोस गांव की 116 आराजी से लगभग 32 हेक्टेयर तथा हरपुर गांव की 640 आराजी से करीब 6 हेक्टेयर भूमि शामिल है।अधिसूचना जारी होने के बाद इन गांवों के किसानों में अपनी जमीन को लेकर चिंता और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है।इसी विषय पर किसान नेता योगीराज के नेतृत्व में रविवार को किसानों की सभा आयोजित की गई,जिसमें बड़ी संख्या में प्रभावित गांवों के किसान शामिल हुए।बैठक में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया,सामाजिक समाघात निर्धारण और आपत्ति दर्ज कराने के कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।किसानों ने कहा कि उनकी कृषि भूमि ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है और इसे छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।सभा में किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं,लेकिन अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी स्थिति में देने के लिए तैयार नहीं हैं।किसानों का कहना है कि जमीन जाने के बाद उनके सामने रोजगार और जीवनयापन का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इसलिए वे अधिसूचना के खिलाफ वैधानिक रूप से आपत्ति दर्ज कराएंगे।


