एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-राजातालाब तहसील परिसर में अधिवक्ताओं के बीच लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।एक प्रकरण के बाद यह नाराजगी खुली बगावत में तब्दील हो गई,जिससे तहसील बार एसोसिएशन के भीतर गंभीर विभाजन की स्थिति बन गई है।तहसील बार के पूर्व अध्यक्ष बच्चा लाल यादव के खिलाफ राजातालाब थाने में दर्ज मुकदमे ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया।आरोप है कि एक मामले में सुलह कराने को लेकर दबाव बनाया गया था।इस संबंध में दिए गए प्रस्ताव पर बार कार्यकारिणी द्वारा कोई ठोस संज्ञान न लिया जाना अधिवक्ताओं के आक्रोश का कारण बन गया।इसी के विरोध में कई अधिवक्ता एकजुट होकर अपने साथी के समर्थन में थाने पहुंचे और कड़ा विरोध दर्ज कराया।इसके बाद बार भवन में बैठक आयोजित हुई,जहां घंटों तक गहन मंथन चला,और नए बार के गठन का निर्णय लिया गया।अधिवक्ता शिवम पांडेय ने कहा कि बच्चा लाल यादव न केवल संस्थापक सदस्यों में रहे हैं,बल्कि प्रथम अध्यक्ष भी रहे हैं।ऐसे वरिष्ठ अधिवक्ता की उपेक्षा किया जाना पूरे अधिवक्ता समाज के सम्मान पर आघात है।उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब अधिवक्ता हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी हो गई है, जिसके तहत “रेवेन्यू बार एसोसिएशन” के गठन का प्रारूप तैयार कर लिया गया है और शीघ्र ही इसका पंजीकरण कराया जाएगा।वहीं पूर्व अध्यक्ष व पूर्व महामंत्री सुनील कुमार सिंह ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताते हुए कहा कि यदि वर्तमान बार कार्यकारिणी ऐसे गंभीर मामले में भी मौन रहती है,तो यह अधिवक्ताओं के आत्मसम्मान के खिलाफ है।उन्होंने कहा कि इस अन्याय के विरोध में नया संगठन खड़ा करना अब अनिवार्य हो गया है।तहसील परिसर में इस घटनाक्रम के बाद माहौल अत्यधिक संवेदनशील और विभाजित नजर आ रहा है।इधर दी तहसील बार एसोसिएशन राजा तालाब के वर्तमान अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि उक्त प्रकरण में प्रस्तावक के प्रस्ताव का संज्ञान लेते हुए बार ने न्यायिक कार्य से विरक्त रहने की घोषणा की है।तहसील बार सभी सम्मानित सदस्यों के साथ हमेशा हर स्थिति में खड़ा है।


