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अवैध प्लाटरो द्वारा नियमो को ताक पर रख बिजली कर्मियों को मिलाकर बगैर स्टीमेट जमा किये बनवाई जा रही फर्जी दर्जनो पोल की एलटी लाइट एमडी व चीफ वाराणसी को ध्यान देने की जरूरत

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एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अवैध प्लाटिंग और फर्जी विद्युत लाइन निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है,जिसने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।आरोप है कि कुछ अवैध प्लाटर,विभागीय बिजलीकर्मियों की मिलीभगत से बिना किसी वैध प्रक्रिया,बिना स्टीमेट जमा किए,दर्जनों बिजली पोल पर एलटी लाइन खड़ी करवा रहे हैं।इससे न केवल विभागीय राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है,बल्कि सरकार की बिजली आपूर्ति प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों तथा स्थानीय सूत्रों की जानकारी के अनुसार नुआंव ग्राम पंचायत और मुड़ादेव-मुंडेश्वर महादेव क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर विभागीय नियमों को खुलेआम ताक पर रख दिया गया।बताया जा रहा है कि नुआंव में 250 केवीए ट्रांसफार्मर से लगभग दस पोल की फर्जी एलटी लाइट,जबकि मुड़ादेव क्षेत्र में 10 केवीए ट्रांसफार्मर से छह पोल की अवैध लाइन खड़ी की गई है। वह भी बिना किसी स्वीकृत प्रस्ताव,बिना स्टीमेट और बिना विभागीय अनुमति के।ग्रामीणों का दावा है कि इन दोनों लोकेशनों पर बनी एलटी लाइनों को विद्युत उपकेंद्र बेटावर से बिजली आपूर्ति की जा रही है। इससे यह संदेह और मजबूत हो जाता है कि पूरा कार्य बिजली विभाग के ही कुछ कर्मचारियों की जानकारी,संरक्षण और सहभागिता में हुआ।सूत्र बताते हैं कि क्षेत्रीय अवर अभियंता,उपखंड अधिकारी,अधिशासी अभियंता से लेकर सरकारी लाइनमैन और संविदा लाइनमैन तक, कई स्तरों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।रोहनिया क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।जमीन का मूल्य बढ़ने के साथ कई प्लाटर किसानों की जमीन औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं और फिर उसे प्लाटिंग कर नई कालोनियाँ बसाने लगे हैं।

लेकिन सबसे गंभीर पहलू यह है कि ये प्लाटर बिजली आपूर्ति के लिए विभागीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से पोल और तार खड़े करा लेते हैं। कभी दस पोल,कभी छह,तो कभी आठ–आठ पोल की फर्जी एलटी लाइन,वह भी कुछ रुपये की रिश्वत देकर।सरकारी प्रक्रिया के अनुसार किसी भी नई कॉलोनी या निर्माण के लिए विद्युत लाइन डालने से पहले विभाग में स्टीमेट जमा करना और उसकी स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है।परंतु इस मामले में न तो कोई स्टीमेट बना,न कोई प्रस्ताव गया,न कोई तकनीकी स्वीकृति मिली। इसके बावजूद लाइनें खड़ी कर दी गईं। इससे जहां प्लाटरों का सीधा आर्थिक लाभ हुआ,वहीं विभाग के लाखों रुपये के राजस्व की क्षति भी हुई।पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिन विभागीय कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे क्षेत्र में किसी भी अवैध विद्युत कार्य पर रोक लगाएँ,वही कर्मचारी इस फर्जीवाड़े को बढ़ावा देने में शामिल बताए जा रहे हैं।यह परिस्थिति इस ओर इशारा करती है कि अवैध प्लाटिंग और फर्जी बिजली लाइन का यह खेल कोई एक-दो व्यक्तियों की करतूत नहीं,बल्कि बड़े पैमाने पर चल रही संगठित मिलीभगत का हिस्सा है।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि अवैध रूप से लगे इन पोलों की बिजली आपूर्ति सीधे विभागीय नेटवर्क से जुड़ी है,ऐसे में हादसों और ओवरलोडिंग का खतरा भी बढ़ रहा है।स्थानीय नागरिकों,सामाजिक संगठनों और जागरूक ग्रामीणों ने इस खबर के माध्यम से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी और वाराणसी के चीफ इंजीनियर से मामले का संज्ञान लेने,उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी कर्मचारियों व प्लाटरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो अवैध प्लाटिंग,फर्जी बिजली लाइन,राजस्व चोरी और विभागीय भ्रष्टाचार की ये गतिविधियाँ और बढ़ेंगी,जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा और भविष्य में बिजली व्यवस्था भी अव्यवस्थित हो सकती है।यह मामला केवल अवैध पोल लगाने या फर्जी लाइन खड़ी करने भर का नहीं है।यह उस व्यापक समस्या का संकेत है जिसमें सरकारी तंत्र,अवैध कारोबार और भ्रष्टाचार एक कड़वी सच्चाई बन चुके हैं।जब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में ही नियमों की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई जा सकती हैं,तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि फिर बाकी जिलों में क्या स्थिति होगी।ग्रामीणों की आवाज अब तेज़ हो चुकी है।वाराणसी में बिजली विभाग की साख और जनविश्वास दांव पर है।अब ज़िम्मेदारी विभागीय शीर्ष अधिकारियों की है कि वे कठोर कार्रवाई करके संदेश दें,कानून से ऊपर कोई नहीं।

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