आकर्षक लाइटें थ्री डी पेंटिंग के अलावा कृत्रिम पेड़ करेंगे मोहित बम ब्लास्ट का भी नहीं होगा कोई असर बंकर का भी करेगा काम
एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बन रहा टनल पहला आर्टिस्टिक टनल है। इसके लिए रघुनाथपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास से खुदाई का काम शुरू हो चुका है। इसे ‘आर्ट एंड नेचर टनल’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके भीतरी दीवारों पर 3 डी पेंटिंग के जरिए काशी की कला व संस्कृति के साथ ही आध्यात्मिक धरोहर को भी दशार्या जाएगा।वहीं उडी लाइटिंग वाले कृत्रिम पेड़ लगाए जाएंगे,जो रात में रंग बदलते हुए मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करेंगे।टनल की सुरक्षा और निगरानी के लिए है क्वालिटी के एचडी कैमरे लगाए जाएंगे।यह प्रोजेक्ट एनएचएआई का ड्रीम प्रोजेक्ट है।इसकी सजावट और डिजाइन पर उतना ही खर्च आएगा जितना टनल निर्माण पर।इन सबके बाद हमारा हवाई अड्डा सिडनी एयरपोर्ट से सुन्दर दिखेगा निर्माण की जिम्मेदारी गुरुग्राम की कंपनी कालूवाला कंस्ट्रक्शन को मिली है।

बता दें कि लगभग दस मीटर गहरी यह टनल दो मीटर मोटी छत के साथ बनाई जा रही है। ताकि इसके ऊपर बोइंग विमान बिना किसी रुकावट के लैंड और टेक-ऑफ कर सकें खास बात यह है कि आपात स्थिति में यह टनल बंकर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।टनल के बीच में बाबतपुर-बसनी रोड आ रहा है,जिसको ओवरब्रिज बनाकर क्रास किया जाएगा।यह ओवरब्रिज मात्र 50 मीटर ही लंबा होगा और ऊंचाई भी ज्यादा नहीं होगी क्योंकि टनल गहराई में होगा और उसके ऊपर ब्रिज होगा जो वर्तमान सड़क के बराबर या इससे थोड़ा ऊंचा होगा।आधा किलोमीटर लंबे टनल के निर्माण की लागत करीब 250 करोड़ बतायी जा रही है।इसमें उन्नत सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं।इसका काम सितंबर 2025 025 में शुरू हुआ था।बताया जाता है टनल निर्माण पूर्ण हो जाने के बाद रनवे का विस्तार किया जाएगा। मौजूदा 2,745 मीटर लंबी रनवे को 4,075 मीटर तक बढ़ाकर बोइंग 777 जैसे बड़े एयरक्राफ्ट्स भी यहाँ उतारे जा सकेंगे।आधिकारिक सूत्रों का कहना है यह परियोजना 2027 की तीसरी तिमाही तक यह परियोजना पूर्ण हो जाएगी।

वही इस बाबत एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता का कहना रहा की एयरपोर्ट पर टनल का काम तेजी से चल रहा है।हालांकि इसे एनएचआई बना रही है।लेकिन अन्य दूसरे कार्य भी चल रहे हैं। जिसे एयरपोर्ट अथारिटी द्वारा किया जा रहा है।यह सिर्फ एक निर्माण नहीं,बल्कि पूर्वांचल की प्रगति और भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक होगा।यह टनल आने वाले समय में वाराणसी की पहचान बनेगा।


