एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही नीतियों को सर्वर्ण समाज के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए माँ कालिका किसान मोर्चा के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता उपदेश मिश्रा ‘सन्नी’ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।उन्होंने यह इस्तीफा मंडल अध्यक्ष विवेक सिंह को सौंपते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया।अधिवक्ता उपदेश मिश्रा ने कहा कि यूजीसी के जरिए जो व्यवस्था थोपी जा रही है,वह शिक्षा सुधार नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से एक वर्ग को हाशिये पर धकेलने की साजिश है।योग्यता,परिश्रम और समान अवसर जैसे संवैधानिक मूल्यों को कुचलकर समाज में असंतुलन पैदा किया जा रहा है।

यह नीतियां सर्वर्ण समाज के युवाओं के भविष्य पर सुनियोजित प्रहार हैं,जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब सत्ता संवैधानिक मर्यादाओं को लांघकर सामाजिक न्याय के नाम पर अन्याय करने लगे, तब चुप रहना अपराध बन जाता है। ऐसे में पद,प्रतिष्ठा और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से ऊपर उठकर सच के साथ खड़ा होना आवश्यक है।इसी कारण उन्होंने अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देकर सड़क से संसद तक संघर्ष का रास्ता चुनने की घोषणा की।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष विवेक सिंह,महामंत्री चंद्रकांत पाण्डेय,मंत्री अवनीश मिश्रा,अमरेश मिश्रा (दुर्गेश),पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष अधिवक्ता दीपक सिंह,प्रितेश त्रिपाठी,आशुतोष मिश्रा,आशुतोष उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।अधिवक्ता उपदेश मिश्रा सन्नी ने एक स्वर में यूजीसी के नाम पर थोपे जा रहे इस “काले कानून” को वापस लेने की मांग की।कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का निर्णय नहीं,बल्कि उस उबाल की आवाज़ है जो सर्वर्ण समाज के घर-घर में पनप रही है।यदि सरकार ने समय रहते इस चेतावनी को नहीं समझा तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।


