spot_img
13.1 C
Varanasi
Saturday, February 14, 2026

Buy now

spot_img

गंगापुर की प्राचीन रामलीला: सदियों से चली आ रही आस्था की एक अनूठी गाथा

spot_img

रिपोर्ट:एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी:गंगापुर:काशी नरेश महाराज बलवंत सिंह द्वारा स्थापित गंगापुर की रामलीला, जो सैकड़ों साल पुरानी है, आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। यह रामलीला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

राज परिवार से जनता के बीच तक का सफर

गंगापुर के गोपाल दास अग्रहरी के अनुसार, यह रामलीला मूल रूप से काशी नरेश के किले के तहसील परिसर में आयोजित होती थी। राजा के संरक्षण में शुरू हुई यह परंपरा बाद में जनता के हाथों में आ गई। राजा साहब के जाने के बाद, रामलीला को गंगापुर के गोला बाजार में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने इसे अपना लिया और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ इसे जारी रखे हुए हैं।
समर्पण और सहयोग की मिसाल
1975 में, इस रामलीला को और व्यवस्थित करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया, जिसमें स्वर्गीय राम किशन सेठ और स्वर्गीय राम जी पहलवान जैसे समर्पित लोग शामिल थे। इस परंपरा को जीवित रखने में कई महान कलाकारों और आयोजकों का योगदान रहा है। व्यासपीठ की जिम्मेदारी स्वर्गीय पन्नालाल, स्वर्गीय मुन्नू महाराज और स्वर्गीय छेदी लाल केसरी ने संभाली, जबकि निर्देशन विनय शंकर गुप्ता ने किया।
वर्तमान पीढ़ी संभाल रही है विरासत
वर्तमान में, रामलीला की इस अनूठी विरासत को नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष राजेश केसरी हैं, जबकि व्यासपीठ की जिम्मेदारी गोपाल दास अग्रहरी निभा रहे हैं और राजीव सेठ निदेशक की भूमिका में हैं।

दस दिवसीय महापर्व: आस्था और भाईचारे का संदेश

यह दस दिवसीय रामलीला हर साल 22 सितंबर से शुरू होकर विजय दशमी के दिन रावण दहन के साथ समाप्त होती है। यह आयोजन भगवान राम के जीवन की कहानी को मंच पर उतारता है, साथ ही समाज में नैतिकता, भाईचारे और धार्मिक आस्था का गहरा संदेश देता है। गंगापुर की यह प्राचीन रामलीला सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है जो लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ता है और सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखता है।

spot_img

सम्बन्धित ख़बरें

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

लेटेस्ट न्यूज़

error: Content is protected !!

Home

Latest News

Web Stories

WhatsApp