एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-आराजी लाइन विकास खण्ड के ग्राम पंचायत बेनीपुर में बीते नौ माह से बन रहे आरआरसी सेंटर का कार्य अभी तक पूर्ण है इतना ही नही आरआरसी सेंटर में दो नम्बर/दोयम दर्जे के ईंट का प्रयोग हो रहा है नाम मात्र की भस्सी व हल्के ब्रिक्स का प्रयोग किया जा रहा है जो गुणवत्तापूर्ण कार्य के दावा की पोल खोलता नजर आ रहा है।

इतना ही नही आराजी लाइन विकास खण्ड के सैकड़ो गाँवो में आरआरसी सेंटर शोपीस” बनकर रह गया है का मतलब है कि रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी),जो गांवों में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए बने थे,अब अधिकारियों की लापरवाही,कर्मचारियों की कमी और खराब रखरखाव के कारण बेकार पड़े हैं और सिर्फ़ दिखावे की चीज़ बन गए हैं,जबकि गांवों में अभी भी गंदगी फैल रही है और सरकार के लाखों रुपये बर्बाद हो रहे हैं।

निष्क्रियता:सेंटर बनकर तैयार तो हो गए,लेकिन कचरा संग्रहण और निपटान के लिए कोई व्यवस्था न होने से चालू नहीं हो पाए हैं।
लापरवाही और भ्रष्टाचार:ग्राम प्रधान,सचिव और अन्य अधिकारियों की उदासीनता के कारण इनका संचालन नहीं हो पा रहा है,जिससे भ्रष्टाचार की आशंका भी है।
कर्मचारियों का अभाव:सेंटरों की देखरेख और संचालन के लिए स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है।

जर्जर हालत:रखरखाव के अभाव में सेंटरों के टीन शेड टूट गए हैं,दीवारें जर्जर हो गई हैं और चारों ओर गंदगी जमा हो गई है।
असफल स्वच्छता अभियान:सेंटरों के बेकार होने से गांवों में कचरा खुले में फेंका जा रहा है,जिससे स्वच्छता अभियान का उद्देश्य विफल हो रहा है।

वही अपूर्ण आरआरसी सेंटर बेनीपुर में कार्य कर रहे कर्मचारियों ने नाम ना बताते हुए बताया कि दो नम्बर के ईंटो से कार्य हुआ है,भस्सी दो से तीन इंच डालकर ब्रिक्स लगाने की नियम है।वही ग्रामीणों ने बताया कि सफेद बालू का प्रयोग व दो नम्बर के ईंट का प्रयोग कर बार्डर बनाया गया है जो वर्तमान समय मे टूट रहा है।


