एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-राजातालाब तहसील परिसर में गुरुवार को बार-बेंच के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बैठक आयोजित की गई।बैठक में वकीलों की अध्यक्षता अधिवक्ताओं के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने की।इस दौरान अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन पर गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के आरोप लगाए।बैठक की शुरुआत में वकीलों ने तहसील परिसर में व्याप्त गंदगी,32/38 की लंबित कार्रवाइयाँ धारा 80 की फाइलों में अत्यधिक देरी तथा आदेश पारित होने के बाद भी फाइलों के निस्तारण में महीनों तक विलंब जैसी समस्याएँ प्रमुखता से उठाईं।अधिवक्ताओं ने कहा कि तहसील में पारदर्शिता का अभाव है और कई विभागों में जनता को न्याय पाने के लिए महीनों तक इंतज़ार करना पड़ता है।वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन धारा 30 की पत्रावलियाँ डिस्प्ले नहीं करता,जिससे कई मामलों की जानकारी संबंधित पक्षों को समय से नहीं मिल पाती।

उन्होंने कहा कि तहसील में “फाइल सिस्टम” पूरी तरह अस्त-व्यस्त है और अधिकारी मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं।बैठक के दौरान अधिवक्ताओं और एसडीएम के बीच तीखी बहस भी हुई।अधिवक्ताओं का कहना है कि जब उन्होंने सवाल रखना शुरू किया तो एसडीएम जवाब नहीं दे सके और नाराज होकर अपनी डायरी पटक कर मीटिंग बीच में ही छोड़कर चले गए।अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि इस दौरान एसडीएम ने बातचीत में ‘तु’ और ‘तुम’ जैसे अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया जो उनके पद की गरिमा के विपरीत है।इस व्यवहार से अधिवक्ताओं में गहरा रोष व्याप्त हो गया।वकीलों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी अगर इस तरह का रवैया अपनाएँगे तो न्याय की व्यवस्था प्रभावित होगी।नाराज वकीलों ने नारे लगाते हुए “अधिवक्ता एकता ज़िंदाबाद” के स्वर में अपना विरोध दर्ज कराया।अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि एसडीएम माफी नहीं मांगते तो आगे की रणनीति तय की जाएगी।


