एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-वाराणसी के शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ने गुरुवार शाम एसआईआर प्रक्रिया को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की।इस दौरान उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के पहले चरण के बाद की गई जांच में उनकी विधानसभा क्षेत्र में 9,200 मतदाताओं के नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 11 प्रतिशत है।मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष की साजिश के तहत वाराणसी में “वोट जिहाद” जैसा काम चल रहा है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि एसआईआर शुरू होने से पहले शहर उत्तरी विधानसभा में कुल 4 लाख 45 हजार मतदाता थे,जिनमें से 1 लाख 10 हजार नाम हटाए गए।

6 जनवरी को फाइनल सूची आने के बाद 90 हजार मतदाताओं की जांच कराई गई,जिसमें 9,200 नाम ऐसे मिले जो एक से अधिक बार दर्ज थे।उन्होंने कहा कि कई मामलों में नाम पता और पिता का नाम तक समान है,फिर भी वे अलग-अलग बूथों पर दर्ज हैं,जो बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान कई ऐसी महिलाओं के नाम सामने आए,जिनकी उम्र 30 से 40 वर्ष के बीच है और उनका नाम मायके तथा ससुराल दोनों जगह मतदाता सूची में दर्ज है।कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम दो से तीन बार,जबकि कुछ का पांच-पांच बार तक पाया गया।मंत्री ने कहा कि यह लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया कार्य प्रतीत होता है।प्रेस वार्ता के बाद मंत्री रविंद्र जायसवाल ने भाजपा एमएलसी एवं जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा के साथ जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की जांच की मांग की।उन्होंने कहा कि यदि 90 हजार मतदाताओं की जांच में 9,200 डुप्लीकेट नाम मिले हैं,तो पूरी सूची की पुनः जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।इस मामले पर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मतदाता सूची में डुप्लीकेट नामों को लेकर समय-समय पर आपत्तियां आती रहती हैं और उनका निस्तारण किया जाता है। विधायक और जिलाध्यक्ष द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों की जांच कराई जा रही है।उन्होंने कहा कि अलग-अलग बूथों पर एक ही नाम होने के मामले का परीक्षण कराया जा रहा है और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे,उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


